क्या आने वाला है तेल का महा संकटMay 12, 2026 10:18 pm ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान गुजरात में भी उन्होंने इन अपीलों को दोहराया था। पीएम मोदी ने कहा था, 'जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।' उन्होंने कहा, 'भारत का नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।' AI Quick Readप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा, 'विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें चुनौती को स्वीकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा।' इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से कुछ समय तक सोना नहीं खरीदने और ईंधन बचाने की अपील कर दी थी। वहीं, इसके बाद सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया कि ईरान के साथ युद्धविराम 'बेहद कमजोर और नाजुक' स्थिति में है। इसके साथ ही अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि क्या अमेरिका और ईरान का युद्ध अब तक के सबसे घातक मोड़ पर जा रहा है, जिसके चलते पहले से ही प्रभावित सप्लाई चेन और खराब स्थिति में पहुंच सकती हैं?
खबरें ये भी हैं कि ट्रंप ईरान पर बड़ी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से अब तक कुछ नहीं कहा गया है।पीएम मोदी ने क्या कहा थापीएम मोदी की तरफ से 7 अपीलें की गईं थीं। उन्होंने कहा था-- घर से काम को बढ़ावा दें- एक साल तक सोना न खरीदें- तेल की बचत करें- खाने के तेल का इस्तेमाल घटाएं- प्राकृतिक खेती अपनाएं- स्वदेशी अपनाएं- अगले एक साल तक विदेश घूमने जाने का प्रोग्राम न बनाएंगुजरात में दोहराई बातगुजरात में भी उन्होंने इन अपीलों को दोहराया था। पीएम मोदी ने कहा था, 'जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।' उन्होंने कहा, 'भारत का नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।' उन्होंने बताया कि पिछले दशकों में जब भी देश ने युद्ध या किसी बड़े संकट का सामना किया, तो नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाया।उन्होंने कहा, 'आज भी हम सभी को एकजुट होकर अपने कर्तव्यों का पालन करने की आवश्यकता है, जिससे देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके।' उन्होंने लोगों से विदेशों में जाकर विवाह करने के चलन 'डेस्टिनेशन वेडिंग' से बचने और खाद्य तेलों की खपत कम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने स्कूली छात्रों के लिए अस्थायी ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने का सुझाव दिया।उन्होंने नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने की अपनी अपील को दोहराया और लोगों से इस संकट को देखते हुए सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की, जिसने बड़े पैमाने पर परेशानियां पैदा की हैं।सीजफायर नहीं हो पाया28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद पहली बार ट्रंप ने 7 अप्रैल को घोषणा की थी कि ईरान के साथ अस्थायी संघर्ष विराम हो गया है। हालांकि, इसके बाद इसे कई बार बढ़ाया गया, लेकिन स्थायी शांति की बात अब तक नहीं हो सकी है। पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की थी, लेकिन पहले दौर की बातचीत बेनतीजा निकलने के बाद दोनों मुल्क इस्लामाबाद में एक मंच पर नहीं आ सके हैं।बड़े हमले की तैयारी में ट्रंप?अब खबर है कि ट्रंप ईरान मामले में आगे की कार्रवाई के लिए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से मुलाकात करने जा रहे हैं। फिलहाल, ट्रंप सरकार ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। एक्सियोस के अनुसार, तीन अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि इन उपायों में सैन्य कार्रवाई को फिर शुरू करना भी शामिल हो सकता है। इनमें से दो अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप ईरान पर दबाव डालने के लिए सैन्य कार्रवाई की ओर आगे बढ़ रहे हैं।सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि पेंटागन के कुछ अधिकारी ईरान पर दबाव डालने के लिए आक्रामक रवैया अपनाने के पक्ष में हैं। वहीं, कुछ बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने का समर्थन कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि आक्रामक उपायों में ईरान पर हमले शामिल हैं। उनका मानना है कि इसके चलते तेहरान कमजोर हो सकता है।
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क्या आने वाला है तेल का महा संकटMay 12, 2026 10:18 pm ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान गुजरात में भी उन्होंने इन अपीलों को दोहराया था। पीएम मोदी ने कहा था, 'जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।' उन्होंने कहा, 'भारत का नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।' AI Quick Readप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा, 'विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें चुनौती को स्वीकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा।' इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से कुछ समय तक सोना नहीं खरीदने और ईंधन बचाने की अपील कर दी थी। वहीं, इसके बाद सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया कि ईरान के साथ युद्धविराम 'बेहद कमजोर और नाजुक' स्थिति में है। इसके साथ ही अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि क्या अमेरिका और ईरान का युद्ध अब तक के सबसे घातक मोड़ पर जा रहा है, जिसके चलते पहले से ही प्रभावित सप्लाई चेन और खराब स्थिति में पहुंच सकती हैं? खबरें ये भी हैं कि ट्रंप ईरान पर बड़ी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से अब तक कुछ नहीं कहा गया है।पीएम मोदी ने क्या कहा थापीएम मोदी की तरफ से 7 अपीलें की गईं थीं। उन्होंने कहा था-- घर से काम को बढ़ावा दें- एक साल तक सोना न खरीदें- तेल की बचत करें- खाने के तेल का इस्तेमाल घटाएं- प्राकृतिक खेती अपनाएं- स्वदेशी अपनाएं- अगले एक साल तक विदेश घूमने जाने का प्रोग्राम न बनाएंगुजरात में दोहराई बातगुजरात में भी उन्होंने इन अपीलों को दोहराया था। पीएम मोदी ने कहा था, 'जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।' उन्होंने कहा, 'भारत का नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।' उन्होंने बताया कि पिछले दशकों में जब भी देश ने युद्ध या किसी बड़े संकट का सामना किया, तो नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाया।उन्होंने कहा, 'आज भी हम सभी को एकजुट होकर अपने कर्तव्यों का पालन करने की आवश्यकता है, जिससे देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके।' उन्होंने लोगों से विदेशों में जाकर विवाह करने के चलन 'डेस्टिनेशन वेडिंग' से बचने और खाद्य तेलों की खपत कम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने स्कूली छात्रों के लिए अस्थायी ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने का सुझाव दिया।उन्होंने नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने की अपनी अपील को दोहराया और लोगों से इस संकट को देखते हुए सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की, जिसने बड़े पैमाने पर परेशानियां पैदा की हैं।सीजफायर नहीं हो पाया28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद पहली बार ट्रंप ने 7 अप्रैल को घोषणा की थी कि ईरान के साथ अस्थायी संघर्ष विराम हो गया है। हालांकि, इसके बाद इसे कई बार बढ़ाया गया, लेकिन स्थायी शांति की बात अब तक नहीं हो सकी है। पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की थी, लेकिन पहले दौर की बातचीत बेनतीजा निकलने के बाद दोनों मुल्क इस्लामाबाद में एक मंच पर नहीं आ सके हैं।बड़े हमले की तैयारी में ट्रंप?अब खबर है कि ट्रंप ईरान मामले में आगे की कार्रवाई के लिए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से मुलाकात करने जा रहे हैं। फिलहाल, ट्रंप सरकार ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। एक्सियोस के अनुसार, तीन अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि इन उपायों में सैन्य कार्रवाई को फिर शुरू करना भी शामिल हो सकता है। इनमें से दो अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप ईरान पर दबाव डालने के लिए सैन्य कार्रवाई की ओर आगे बढ़ रहे हैं।सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि पेंटागन के कुछ अधिकारी ईरान पर दबाव डालने के लिए आक्रामक रवैया अपनाने के पक्ष में हैं। वहीं, कुछ बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने का समर्थन कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि आक्रामक उपायों में ईरान पर हमले शामिल हैं। उनका मानना है कि इसके चलते तेहरान कमजोर हो सकता है।