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Sunita Williams Return Mission: धरती पर लौटने वाली हैं सुनीता विलियम्स, ISS पर पहुंचा नासा का क्रू-10 मिशन

नासा का क्रू -10 मिशन: नौ महीने से अंतरिक्ष में मौजूद सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर जल्द ही पृथ्वी लौटने वाले हैं। उनकी वापसी के लिए नासा का क्रू-10 मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंच चुका है। यह मिशन फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था, जिसमें चार नए अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। इन यात्रियों का काम स्टेशन पर वैज्ञानिक प्रयोगों को आगे बढ़ाना और पुराने क्रू को बदलना होगा।

तकनीकी कारणों से लंबी हो गई थी यात्रा

विलियम्स और विल्मोर को कुछ महीनों में वापस लौटना था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण वे नौ महीने तक ISS पर ही रुक गए। वे पिछले साल जून में बोइंग स्टारलाइनर से वहां पहुंचे थे, लेकिन सुरक्षा चिंताओं के चलते उनकी वापसी टलती रही। अब स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल से उनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया है।

क्रू-10 मिशन का सफर और नई जिम्मेदारियां

क्रू-10 मिशन में ऐनी मैकक्लेन, निकोल एयर्स, ताकुया ओनिशी और किरिल पेसकोव शामिल हैं। ये चारों ISS में पहुंचकर वहां चल रहे 200 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी परीक्षणों को आगे बढ़ाएंगे। उनकी मौजूदगी से स्टेशन का संचालन सुचारु रूप से जारी रहेगा और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को दिशा मिलेगी।

यह मिशन शुक्रवार को फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। इससे पहले इसे बुधवार को लॉन्च किया जाना था, लेकिन ग्राउंड सपोर्ट सिस्टम में आई खराबी के चलते इसे रोक दिया गया था। स्पेसएक्स की टीम ने तकनीकी खामियों को ठीक करने के बाद मिशन को दोबारा मंजूरी दी और यह बिना किसी रुकावट के अपने गंतव्य तक पहुंच गया।

क्रू-10 मिशन शनिवार रात ISS से जुड़ चुका है और रविवार को अंतरिक्ष यात्री स्टेशन के अंदर प्रवेश करेंगे। इसके बाद विलियम्स और विल्मोर की वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी। नासा के मुताबिक, वे अगले हफ्ते तक पृथ्वी पर लौट आएंगे।

ISS में नया दल अगले छह महीने तक रहेगा और कई अहम वैज्ञानिक अनुसंधानों में योगदान देगा। दूसरी ओर, विलियम्स और विल्मोर की लंबी यात्रा खत्म होने वाली है, और वे जल्द ही अपनों के बीच वापस होंगे। यह मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक और बड़ा कदम साबित होगा।

Sunita Williams Return Mission: धरती पर लौटने वाली हैं सुनीता विलियम्स, ISS पर पहुंचा नासा का क्रू-10 मिशन

यह मिशन शुक्रवार को फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। इससे पहले इसे बुधवार को लॉन्च किया जाना था, लेकिन ग्राउंड सपोर्ट सिस्टम में आई खराबी के चलते इसे रोक दिया गया था।

नई दिल्ली

अद्यतन:

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नासा के एक वीडियो के इस स्क्रीनशॉट में रविवार, 16 मार्च, 2025 को स्पेसएक्स कैप्सूल के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ने के बाद सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्ष यात्री एक-दूसरे का अभिवादन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। (फोटो- नासा/ पीटीआई)
नासा के एक वीडियो के इस स्क्रीनशॉट में रविवार, 16 मार्च, 2025 को स्पेसएक्स कैप्सूल के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ने के बाद सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्ष यात्री एक-दूसरे का अभिवादन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। (फोटो- नासा/ पीटीआई)

नासा का क्रू -10 मिशन: नौ महीने से अंतरिक्ष में मौजूद सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर जल्द ही पृथ्वी लौटने वाले हैं। उनकी वापसी के लिए नासा का क्रू-10 मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंच चुका है। यह मिशन फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था, जिसमें चार नए अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। इन यात्रियों का काम स्टेशन पर वैज्ञानिक प्रयोगों को आगे बढ़ाना और पुराने क्रू को बदलना होगा।

तकनीकी कारणों से लंबी हो गई थी यात्रा

विलियम्स और विल्मोर को कुछ महीनों में वापस लौटना था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण वे नौ महीने तक ISS पर ही रुक गए। वे पिछले साल जून में बोइंग स्टारलाइनर से वहां पहुंचे थे, लेकिन सुरक्षा चिंताओं के चलते उनकी वापसी टलती रही। अब स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल से उनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया है।

क्रू-10 मिशन का सफर और नई जिम्मेदारियां

क्रू-10 मिशन में ऐनी मैकक्लेन, निकोल एयर्स, ताकुया ओनिशी और किरिल पेसकोव शामिल हैं। ये चारों ISS में पहुंचकर वहां चल रहे 200 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी परीक्षणों को आगे बढ़ाएंगे। उनकी मौजूदगी से स्टेशन का संचालन सुचारु रूप से जारी रहेगा और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को दिशा मिलेगी।

यह मिशन शुक्रवार को फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। इससे पहले इसे बुधवार को लॉन्च किया जाना था, लेकिन ग्राउंड सपोर्ट सिस्टम में आई खराबी के चलते इसे रोक दिया गया था। स्पेसएक्स की टीम ने तकनीकी खामियों को ठीक करने के बाद मिशन को दोबारा मंजूरी दी और यह बिना किसी रुकावट के अपने गंतव्य तक पहुंच गया।

क्रू-10 मिशन शनिवार रात ISS से जुड़ चुका है और रविवार को अंतरिक्ष यात्री स्टेशन के अंदर प्रवेश करेंगे। इसके बाद विलियम्स और विल्मोर की वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी। नासा के मुताबिक, वे अगले हफ्ते तक पृथ्वी पर लौट आएंगे।

ISS में नया दल अगले छह महीने तक रहेगा और कई अहम वैज्ञानिक अनुसंधानों में योगदान देगा। दूसरी ओर, विलियम्स और विल्मोर की लंबी यात्रा खत्म होने वाली है, और वे जल्द ही अपनों के बीच वापस होंगे। यह मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक और बड़ा कदम साबित होगा।

विषयनासा स्पेसक्राफ्ट्संग विलियम्स
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पहले प्रकाशित: 16-03-2025 09:58 पर है



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Spacecraft Time Journey: ड्रैगन से लगे 17 घंटे, रूसी सोयुज लेता है सिर्फ 3 घंटे; सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष से धरती पर वापसी में इतना फर्क क्यों?

सोयुज और ड्रैगन अंतर:अंतरिक्ष यात्रियों की पृथ्वी वापसी में कुछ यान घंटों में पहुंच जाते हैं, तो कुछ को पूरा दिन लग सकता है। हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से 17 घंटे में पृथ्वी पर लौटे। जबकि, रूस का सोयुज यान वही सफर सिर्फ 3 घंटे में पूरा कर लेता है। लेकिन ऐसा क्यों? आखिर दो यानों के बीच समय में इतना बड़ा अंतर क्यों होता है?

सोयुज यान (सोयुज अंतरिक्ष यान) की डिजाइन 1960 के दशक में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को तेजी से और सुरक्षित पृथ्वी पर लाना है। यह तीन चरणों में पृथ्वी तक पहुंचता है:—

तेज डी-ऑर्बिट बर्न: आईएसएस से निकलने के बाद, सोयुज यान तीव्र गति से पृथ्वी की ओर बढ़ता है।

एटमॉस्फियर री-एंट्री: यह लगभग 90 डिग्री के कोण से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, जिससे यह बहुत तेजी से घर्षण से ब्रेक लगाता है।

पैराशूट और लैंडिंग: अंतिम चरण में चार बड़े पैराशूट इसे धीमा करते हैं, और लैंडिंग से ठीक पहले इंजन बूस्ट इसकी गति और कम कर देता है।

समय: यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ़ 3 घंटे में पूरी होती है, क्योंकि यह सीधा और तेज़ लैंडिंग का तरीका अपनाता है।

स्पेसएक्स का ड्रैगन यान (ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट) एक मॉडर्न और अधिक सुरक्षित यान है, जो न केवल तेजी बल्कि आराम और सुरक्षा को भी प्राथमिकता देता है। इसकी वापसी प्रक्रिया लंबी होती है:

  1. धीमा डी-ऑर्बिट बर्न: ड्रैगन यान धीरे-धीरे कक्षा में बदलाव करता है, जिससे यह सही लैंडिंग पथ पर आ सके।
  2. कोणीय री-एंट्री: सोयुज़ के विपरीत, यह वायुमंडल में धीरे-धीरे और झुके हुए कोण से प्रवेश करता है, जिससे तापमान का प्रभाव कम होता है।
  3. समुद्र में लैंडिंग: यह सीधे जमीन पर नहीं गिरता, बल्कि समंदर में उतरता है, जिससे बचाव दल को इसे खोजने और सुरक्षित निकालने में अधिक समय लगता है।

समय: यह पूरी प्रक्रिया 17 घंटे तक लंबी हो सकती है, क्योंकि यह यात्रा को अधिक नियंत्रित और आरामदायक बनाता है।

दोनों के बीच मुख्य अंतर

फीचर सोयुज़ ड्रैगन
डिज़ाइन वर्ष 1960 के दशक 2010 के दशक
यात्रा का समय 3 घंटे 17 घंटे
लैंडिंग स्थान कज़ाखस्तान (ज़मीन) फ्लोरिडा तट (समंदर)
गति नियंत्रण तेज और सीधा धीरे-धीरे और सुरक्षित
यात्रियों की संख्या 3 लोग 7 लोग
हीट शील्ड प्रभाव अधिक गर्मी सहन करना पड़ता है गर्मी को फैलाकर नियंत्रित किया जाता है
लैंडिंग प्रक्रिया पैराशूट + इंजन ब्रेक पैराशूट + पानी में उतरने की तैयारी

सोयुज यान तेजी से नीचे आता है, लेकिन इसमें गुरुत्वाकर्षण का ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को अधिक कठिनाई होती है। ड्रैगन यान की यात्रा लंबी जरूर होती है, लेकिन यह सॉफ्ट लैंडिंग और कम दबाव के कारण यात्रियों के लिए अधिक अनुकूल है।

Spacecraft Time Journey: ड्रैगन से लगे 17 घंटे, रूसी सोयुज लेता है सिर्फ 3 घंटे; सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष से धरती पर वापसी में इतना फर्क क्यों?

स्पेस यात्रा में समय का ये फ़ासला सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि एक खास रणनीति की वजह से है।

नई दिल्ली

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सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष यान, ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट और सोयुज स्पेसक्राफ्ट के बीच अंतर, ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट और सोयुज स्पेसक्राफ्ट के बीच समय अंतर
रूसी स्पेसक्राफ्ट सोयूज (बाएं) और एलन मस्क की स्पेसएक्स की ड्रैगन। (फोटो- एपी/पीटीआई)

सोयुज और ड्रैगन अंतर:अंतरिक्ष यात्रियों की पृथ्वी वापसी में कुछ यान घंटों में पहुंच जाते हैं, तो कुछ को पूरा दिन लग सकता है। हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से 17 घंटे में पृथ्वी पर लौटे। जबकि, रूस का सोयुज यान वही सफर सिर्फ 3 घंटे में पूरा कर लेता है। लेकिन ऐसा क्यों? आखिर दो यानों के बीच समय में इतना बड़ा अंतर क्यों होता है?

सोयुज यान (सोयुज अंतरिक्ष यान) की डिजाइन 1960 के दशक में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को तेजी से और सुरक्षित पृथ्वी पर लाना है। यह तीन चरणों में पृथ्वी तक पहुंचता है:—

तेज डी-ऑर्बिट बर्न: आईएसएस से निकलने के बाद, सोयुज यान तीव्र गति से पृथ्वी की ओर बढ़ता है।

एटमॉस्फियर री-एंट्री: यह लगभग 90 डिग्री के कोण से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, जिससे यह बहुत तेजी से घर्षण से ब्रेक लगाता है।

पैराशूट और लैंडिंग: अंतिम चरण में चार बड़े पैराशूट इसे धीमा करते हैं, और लैंडिंग से ठीक पहले इंजन बूस्ट इसकी गति और कम कर देता है।

समय: यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ़ 3 घंटे में पूरी होती है, क्योंकि यह सीधा और तेज़ लैंडिंग का तरीका अपनाता है।

स्पेसएक्स का ड्रैगन यान (ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट) एक मॉडर्न और अधिक सुरक्षित यान है, जो न केवल तेजी बल्कि आराम और सुरक्षा को भी प्राथमिकता देता है। इसकी वापसी प्रक्रिया लंबी होती है:

  1. धीमा डी-ऑर्बिट बर्न: ड्रैगन यान धीरे-धीरे कक्षा में बदलाव करता है, जिससे यह सही लैंडिंग पथ पर आ सके।
  2. कोणीय री-एंट्री: सोयुज़ के विपरीत, यह वायुमंडल में धीरे-धीरे और झुके हुए कोण से प्रवेश करता है, जिससे तापमान का प्रभाव कम होता है।
  3. समुद्र में लैंडिंग: यह सीधे जमीन पर नहीं गिरता, बल्कि समंदर में उतरता है, जिससे बचाव दल को इसे खोजने और सुरक्षित निकालने में अधिक समय लगता है।

समय: यह पूरी प्रक्रिया 17 घंटे तक लंबी हो सकती है, क्योंकि यह यात्रा को अधिक नियंत्रित और आरामदायक बनाता है।

दोनों के बीच मुख्य अंतर

फीचर सोयुज़ ड्रैगन
डिज़ाइन वर्ष 1960 के दशक 2010 के दशक
यात्रा का समय 3 घंटे 17 घंटे
लैंडिंग स्थान कज़ाखस्तान (ज़मीन) फ्लोरिडा तट (समंदर)
गति नियंत्रण तेज और सीधा धीरे-धीरे और सुरक्षित
यात्रियों की संख्या 3 लोग 7 लोग
हीट शील्ड प्रभाव अधिक गर्मी सहन करना पड़ता है गर्मी को फैलाकर नियंत्रित किया जाता है
लैंडिंग प्रक्रिया पैराशूट + इंजन ब्रेक पैराशूट + पानी में उतरने की तैयारी

सोयुज यान तेजी से नीचे आता है, लेकिन इसमें गुरुत्वाकर्षण का ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को अधिक कठिनाई होती है। ड्रैगन यान की यात्रा लंबी जरूर होती है, लेकिन यह सॉफ्ट लैंडिंग और कम दबाव के कारण यात्रियों के लिए अधिक अनुकूल है।

विषयDragonelon Musknasanasa अंतरिक्ष यानक्रेफ़्टुनीता विलियम्स

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पहले प्रकाशित: 21-03-2025 09:02 पर है

। लैंडिंग (टी) नासा (टी) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

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