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डोनाल्ड ट्रंप ने नए टैरिफ प्लान की घोषणा की, सीनेट मंजूरी नहीं चाहिए.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को टैरिफ प्लान की घोषणा कर दी, ये तुरंत प्रभाव से पूरी दुनिया में लागू हो गया. उसमें उन्होंने अलग अलग देशों के लिए अलग टैरिफ दरें तय की हैं. अब सवाल इस बात का है कि क्या ट्रंप का आर्डर सीधे लागू हो जाएगा या इसके लिए अमेरिकी सीनेट की मंजूरी लेनी होगी. ट्रंप ने नए टैरिफ की घोषणा करते हुए अपने किन अधिकारों का इस्तेमाल किया है.

सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ प्लान लागू करने के लिए अपने एग्जीक्यूटिव आर्डर का इस्तेमाल किया है. ये प्लान 2 अप्रैल 2025 से प्रभावी भी हो गया है

सवाल – क्या ट्रंप को इस टैरिफ को लागू करने के लिए सीनेट की अनुमति की जरूरत है?
– नहीं है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति को व्यापार नीति और टैरिफ लगाने के संबंध में व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, जो मुख्य रूप से एग्जीक्यूटिव पावर के तहत आते हैं. विशेष रूप से, ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 की धारा 301 और इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) जैसे कानून राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए टैरिफ लगाने की शक्ति देते हैं. ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में भी स्टील और एल्यूमीनियम जैसे उत्पादों पर टैरिफ एग्जीक्यूटिव आर्डर के जरिए ही लागू किए थे, जिसे सीनेट की मंजूरी के बिना अमल में लाया गया था.

सवाल – अमेरिकी प्रेसीडेंट की एग्जीक्यूटिव पॉवर्स क्या होती हैं, जो उसे दुनिया का सर्वशक्तिमान नेता बना देती हैं?
– अमेरिकी राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियां यानि एग्जीक्यूटिव पॉवर्स काफी जबरदस्त होती हैं और कई तरीके से इस्तेमाल में आती हैं. ये इस तरह हैं
कानून पर हस्ताक्षर और वीटो- अमेरिकी राष्ट्रपति को कांग्रेस द्वारा पारित विधेयकों पर हस्ताक्षर करने या वीटो करने का अधिकार होता है. हालांकि, कांग्रेस दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से वीटो को पलट सकती है.
सशस्त्र बलों का कमांडर-इन-चीफ –राष्ट्रपति संयुक्त राज्य अमेरिका के सशस्त्र बलों का कमांडर-इन-चीफ होता है, जिससे उन्हें सैन्य अभियानों को निर्देशित करने और सैनिकों की तैनाती का आदेश देने की शक्ति मिलती है.
नियुक्तियां और हटाने की शक्ति – राष्ट्रपति अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों और अन्य उच्च पदाधिकारियों की नियुक्ति करता है, जिनमें से अधिकांश के लिए सीनेट की सलाह और सहमति की जरूरत होती है.
विदेश नीति और संधियां –राष्ट्रपति विदेशी शक्तियों के साथ संधियों पर हस्ताक्षर कर सकता है, जिन्हें सीनेट के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए.
क्षमा और राहत – राष्ट्रपति को संघीय अपराधों के लिए माफी देने का अधिकार होता है.
परमाणु हथियारों का नियंत्रण – राष्ट्रपति के पास परमाणु हथियारों को लॉन्च करने की क्षमता होती है, जो उन्हें एक ब्लैक ब्रीफकेस (न्यूक्लियर फुटबॉल) के माध्यम से प्रदान की जाती है.
कार्यकारी आदेश जारी करना –प्रेसीडेंट एग्जीक्यूटिव आर्डर जारी कर सकता है, जो कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं और कांग्रेस की मंजूरी के बिना लागू होते हैं. इन शक्तियों के साथ, अमेरिकी राष्ट्रपति देश की कार्यकारी शाखा का प्रमुख होता है और व्यापक कार्यकारी अधिकारों का प्रयोग करता है.

सवाल – ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को रेसिप्रोकल टैरिफ क्यों कहा जा रहा है?
– इस मामले में, टैरिफ को “रेसिप्रोकल टैरिफ” के रूप में पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य उन देशों पर जवाबी शुल्क लगाना है जो अमेरिकी आयात पर ऊंचा टैरिफ लगाते हैं.

सवाल – तो क्या सीनेट इस पर कोई सवाल नहीं उठा सकती?
– अगर यह नीति लंबे समय तक या बड़े पैमाने पर लागू रहती है और इसका निगेटिव असर अमेरिका पर पड़ने लगे तो कांग्रेस इस पर सवाल उठा सकती है या इसे संशोधित करने की कोशिश कर सकती है, लेकिन शुरुआती तौर पर यह राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में ही है.

सवाल – तो क्या एग्जीक्यूटिव आर्डर लागू होने के बाद सीनेट की पॉवर वहां पर खत्म हो जाती हैं?
– इसका जवाब समझने के लिए हमें अमेरिकी संविधान और व्यापार से संबंधित कानूनों पर नजर डालनी होगी. अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद I, धारा 8 के तहत, कांग्रेस को कर लगाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने का अधिकार दिया गया है. इसका मतलब है कि सैद्धांतिक रूप से, टैरिफ जैसे व्यापारिक उपायों को लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होनी चाहिए. हालांकि, पिछले कई दशकों में, कांग्रेस ने राष्ट्रपति को व्यापार नीति के क्षेत्र में व्यापक अधिकार सौंप दिए हैं, जिसके चलते राष्ट्रपति अब टैरिफ लगाने जैसे फैसले स्वतंत्र रूप से ले सकते हैं.

इसे लेकर दो प्रमुख कानून हैं: ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 और इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA). ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 की धारा 301 राष्ट्रपति को यह अधिकार देती है कि वह उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करे जो अमेरिकी व्यापार हितों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसमें टैरिफ लगाना, आयात पर प्रतिबंध, या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं. इसी तरह, IEEPA राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में आर्थिक उपाय करने की शक्ति देता है.

सवाल – ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में किस तरह इस कानून का इस्तेमाल किया था?
– ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में इन दोनों कानूनों का इस्तेमाल किया. उदाहरण के लिए, चीन के खिलाफ 2018 में शुरू किए गए व्यापार युद्ध में ट्रंप ने धारा 301 का हवाला देते हुए अरबों डॉलर के चीनी सामानों पर टैरिफ लगाया था. इसके लिए उन्हें सीनेट या हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की मंजूरी नहीं लेनी पड़ी थी.

सवाल – क्या सीनेट डोनाल्ड ट्रंप के इस आर्डर को पलट सकती है?
– भले ही ट्रंप इस टैरिफ को तत्काल प्रभाव से लागू कर सकते हों, लेकिन इसका दीर्घकालिक प्रभाव और वैधता कांग्रेस के हाथ में हो सकती है. अगर सीनेट या हाउस इस नीति को पलटना चाहें, तो वे एक नया कानून पारित कर सकते हैं, जिसके लिए दोनों सदनों में बहुमत और शायद राष्ट्रपति के वीटो को ओवरराइड करने के लिए दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होगी.हालांकि ऐसा करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है, खासकर तब जब ट्रंप की पार्टी का कांग्रेस में मजबूत असर हो.

सवाल – ट्रंप के टैरिफ विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन करते हैं तो क्या इसकी शिकायत हो सकती है?
– बेशक. प्रभावित देश विश्व व्यापार संगठन (WTO) में इसकी शिकायत कर सकते हैं, जैसा कि 2018 में कई देशों ने किया था लेकिन ट्रंप पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था. उन्होंने पहले भी WTO के फैसलों को नजरअंदाज करने की नीति अपनाई थी. इस बार भी ऐसा ही होने की संभावना है.

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Donald Trump Tariff Latest News: डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत-चीन व्यापार संबंधों में नया मोड़

Donald Trump Tariff Latest News: अमेरिका ने टैरिफ से दुनिया में खलबली मचा दी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से पूरी दुनिया में हड़कंप है. इससे वैश्विक व्यापार युद्ध छिड़ने की आशंका है. भारत, चीन हो या पाकिस्तान, अमेरिका ने किसी को नहीं छोड़ा है. सब पर एक नजर से ही टैरिफ लगाया है. डोनाल्ड ट्रंप ने दुनियाभर के देशों पर जैसे को तैसा वाला टैरिफ लगाया है. माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति से कई देशों के बीच जवाबी कार्रवाई की एक श्रृंखला शुरू हो सकती है. ट्रंप के टैरिफ से जो देश ज्यादा प्रभावित हुए हैं, वो बातचीत का रास्ता अपना सकते हैं. कुछ जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं. डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ ऐलान भारत और चीन को काफी नजदीक ला सकता है. ट्रंप के टैरिफ की वजह से ही दो दुश्मन अच्छे दोस्त की राह पर चलकर सबसे बेहतर कारोबार साझेदार बन सकते हैं.

जब डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ का ऐलान नहीं किया था, उससे पहले ही चीन ने कहा, ‘अमेरिका को जल्द ही बातचीत और सहयोग के सही रास्ते पर लौट आना चाहिए, लेकिन अगर अमेरिका युद्ध चाहता है चाहे वह टैरिफ युद्ध हो, व्यापार युद्ध हो या किसी अन्य प्रकार का युद्ध हो, हम अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं.’ अब तो अमेरिका ने टैरिफ का ऐलान कर दिया है. अमेरिका ने भारत पर 26 फीसदी तो चीन पर 34 फीसदी टैरिफ लगाया है.

इस बीच ट्रंप की ओर से ‘टैरिफ का दुरुपयोग करने वाला’ देश कहे जाने के बाद भारत भी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के संभावित तरीकों का आकलन कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा था कि भारत अपने टैरिफ में काफी हद तक कमी करेगा.’ चीन और भारत दोनों के लिए ही इन टैरिफ ने नई आर्थिक मुश्किलें पैदा कर दी हैं. अमेरिका के साथ लंबे समय से चले आ रहे व्यापार युद्ध में उलझे चीन के निर्यात पर और भी दबाव बढ़ता दिख रहा है. वहीं, पारंपरिक रूप से अमेरिका का व्यापारिक सहयोगी रहा भारत अब अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता पर पुनर्विचार करने को मजबूर है.

चीन भारत से अधिक सामान खरीदने को तैयार
टैरिफ की घोषणा से ठीक पहले बीजिंग ने कहा कि वो भारत से और अधिक उत्पादों का आयात करने और व्यापार सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है. बीजिंग के नई दिल्ली में राजदूत जू फीहोंग ने भारतीय उद्यमों से चीन के विकास के लाभ को साझा करने के लिए कहा. उन्होंने चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘हम व्यापार और अन्य क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने और चीनी बाजार के अनुकूल भारतीय उत्पादों का ज्यादा आयात करने के लिए भारतीय पक्ष के साथ काम करने को तैयार हैं.’ उन्होंने कहा, ‘उन्होंने कहा, ‘हम और ज्यादा भारतीय उद्योगों का हिमालय पार कर चीन में सहयोग के मौके तलाशने और चीन के विकास का लाभ उठाने के लिए स्वागत करते हैं.’

भारत-चीन व्यापार संबंध पर एक नजर
2010 के दशक में चीन, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया. चीन से आयात…भारतीय निर्यात से आगे निकल गया. 2020-21 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में खटास आ गई. इसकी वजह से नई दिल्ली ने चीनी निवेशों पर रोक लगा दी. 200 से अधिक चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया और बीजिंग से एफडीआई की जांच शुरू कर दी.

दोनों देशों के बीच कैसा है कारोबार?
दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध और राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत और चीन के बीच व्यापार 2022 में रिकॉर्ड 135.98 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. यह उनकी गहरी आर्थिक निर्भरता को उजागर करता है. भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, 2023-24 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 101.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा. चिंता की एक बड़ी बात यह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और रसायनों में चीनी आयात पर भारी निर्भरता के कारण चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़ रहा है, जो 2023 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया.

ट्रंप के टैरिफ से दोनों देशों पर खतरा?

• भारत और चीन दोनों ही बड़े निर्यातक देश हैं. ऐसे में अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ाने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है.

• भारत और चीन दोनों ही एक जैसे आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं. ऐसे में दोनों देश व्यावहारिक तौर पर एक दूसरे के साथ सहयोग के रास्ते तलाशने को प्रेरित हैं. इसका मतलब यह नहीं कि दोनों देशों के बीच पूरी तरह से गठबंधन हो जाएगा. बल्कि खास आर्थिक मुद्दों पर रणनीतिक रूप से दोनों देश एक दूसरे के साथ आ सकते हैं.

• दोनों ही देश अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अपने व्यापारिक संबंधों को विविधतापूर्ण बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इससे भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के अवसर पैदा होते हैं.

• ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) जैसे मौजूदा क्षेत्रीय आर्थिक ढांचे दोनों देशों को बेहतर सहयोग के लिए मंच प्रदान करते हैं. ये मंच व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास पर चर्चा को बढ़ावा देते हैं.

एरिया ऑफ ऑपर्च्युनिटी

  1. अमेरिका की तरफ से भारी टैरिफ का सामना कर रहे चीन की नजर अब भारत पर है. चीन इसे एक वैकल्पिक प्रोडक्शन हब के तौर पर देख रहा है. अमेरिकी व्यापार प्रतिबंधों से बचने के लिए चीनी कंपनियां भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और दवा क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं.
  2. दूसरा यह कि चीनी सेमीकंडक्टर फर्मों पर अमेरिकी प्रतिबंधों ने बाजार में एक खाली जगह बना दी है. भारत, जो घरेलू चिप बनाने में निवेश कर रहा है, उसे चीनी टेक फर्म नए साझेदारों की तलाश करते हुए दिखाई दे सकती हैं.
  3. तीसरा भारत बड़ी मात्रा में तेल और गैस का आयात करता है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव के साथ चीन नई आपूर्ति श्रृंखला भागीदारी की तलाश कर रहा है. भारतीय अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में चीनी निवेश बढ़ रहे हैं.

भारत-चीन की दोस्ती में चुनौतियां और रोड़े

• भारत और चीन के बीच क्षेत्रीय विवादों का एक लम्बा इतिहास रहा है. खासकर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में. व्यापार में प्रोत्साहन के बावजूद ये तनाव दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक एकीकरण को सीमित कर सकते हैं.

• 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत में जनभावना चीन के खिलाफ हो गई. भारत सरकार ने कुछ क्षेत्रों में चीनी निवेश को प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे सहयोग की गति धीमी हुई है.

• भारत और चीन टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उद्योगों में सीधे प्रतिस्पर्धा करते हैं. सहयोग के लिए सावधानीपूर्वक संतुलन की आवश्यकता होगी ताकि एक पक्ष का दूसरे पर हावी होने से बचा जा सके.

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Elon Musk Will leave after DOGE work over White House on Musk exiting Trump admin buzz | ‘उन्हें लौटना ही होगा…’, जल्द ही ट्रंप सरकार से हटने वाले हैं एलन मस्क! आखिर क्या है कारण?

Elon Musk: सोशल मीडिया पर एलन मस्क को लेकर बड़ा दावा किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि वो ट्रंप सरकार छोड़ सकते हैं. दावे के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कैबिनेट को बताया कि एलन मस्क जल्द ही DOGE (Department of Government Efficiency) के चीफ के पद से हटने वाले हैं. हालांकि इन दावों को व्हाइट हाउस ने खारिज कर दिया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने इस तरह के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है.

बुधवार को X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लीविट ने इस तरह के दावों को कचरा करार दिया. उन्होंने लिखा,’एलन मस्क और राष्ट्रपति ट्रंप दोनों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि मस्क सरकार में अपने विशेष सरकारी कर्मचारी के रूप में तब तक काम करेंगे, जब तक उनका महत्वपूर्ण काम पूरा नहीं हो जाता.’

अपनी कंपनियों पर ध्यान देंगे मस्क

पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप अपने फैसले से खुश हैं और मस्क के DOGE सुधारों का समर्थन कर रहे हैं. हालांकि हाल के दिनों में दोनों के बीच यह सहमति बनी है कि मस्क को जल्द ही अपनी कंपनियों पर ध्यान देना होगा और सरकार में उनकी भूमिका सीमित हो जाएगी.

क्या थी एलन मस्क की जिम्मेदारी

ट्रंप ने मस्क को सरकारी खर्चों में कटौती करने और कई सरकारी एजेंसियों को बंद करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. जनवरी में प्रशासन से जुड़ने के बाद से ही मस्क ने कई कड़े फैसले लिए, जैसे केंद्रीय नौकरियों में कटौती, सरकारी एजेंसियों की फंडिंग रोकना और कॉन्ट्रेक्ट रद्द करना. उन्होंने USAID (यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट) जैसी कई सरकारी संस्थाओं को बंद कर दिया.

व्हाइट हाउस और मस्क की टीम ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. हालांकि एक सीनियर प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि मस्क अनौपचारिक सलाहकार के रूप में व्हाइट हाउस से जुड़े रह सकते हैं और कभी-कभी वहां आ सकते हैं.

कब खत्म होगा मस्क का कार्यकाल?

इसके अलावा जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह मस्क को 130 दिनों की तय अवधि से ज्यादा समय तक रखना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा,’मुझे लगता है कि वह शानदार काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी कंपनी भी है. एक समय के बाद उन्हें लौटना ही होगा. वह खुद भी ऐसा चाहते हैं.’ माना जा रहा है कि मस्क का सरकारी कार्यकाल मई के आखिर तक खत्म हो जाएगा. फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि वह इस अवधि में 1 ट्रिलियन डॉलर (100 लाख करोड़ डॉलर) तक की सरकारी खर्च कटौती पूरी कर लेंगे.

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‘मजाक नहीं कर रहा’, तीसरी बार राष्ट्रपति बनेंगे डोनाल्ड ट्रंप? ‘सीक्रेट प्लान’ पर अमेरिका में हंगामा

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Donald Trump News: क्या डोनाल्ड ट्रंप तीसरी बार राष्‍ट्रपति बनने के लिए किसी ‘सीक्रेट प्लान’ पर काम कर रहे हैं? उनके हालिया बयानों से अमेरिका की राजनीति में हड़कंप मच गया है.

'मजाक नहीं कर रहा', तीसरी बार राष्ट्रपति बनेंगे ट्रंप? सीक्रेट प्लान पर हंगामा

डोनाल्ड ट्रंप (File Photo)

हाइलाइट्स

  • डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरी बार US का राष्ट्रपति बनने का इशारा दिया.
  • अमेरिकी संविधान दो बार से ज्यादा चुनाव जीतने की अनुमति नहीं देता.
  • ट्रंप ने ‘सीक्रेट प्लान’ पर काम करने के संकेत दिए.

वाशिंगटन: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान से अमेरिका की राजनीति में हड़कंप मच गया है. उन्होंने एक बार फिर, तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का इशारा दिया है. NBC न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ‘मैं मजाक नहीं कर रहा.’ अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन, जो 1951 में लागू हुआ था, किसी भी राष्ट्रपति को दो बार से ज्यादा चुनाव जीतने की अनुमति नहीं देता. लेकिन ट्रंप का कहना है कि ‘ऐसे तरीके हैं जिससे इसे किया जा सकता है.’

NBC की पत्रकार क्रिस्टन वेल्कर ने जब ट्रंप से पूछा कि क्या उनके उपराष्ट्रपति (VP) जेडी वांस चुनाव जीतकर बाद में पद छोड़ सकते हैं ताकि ट्रंप फिर राष्ट्रपति बन सकें, तो उन्होंने जवाब दिया – ‘यह एक तरीका है, लेकिन और भी रास्ते हैं.’ जब उनसे दूसरा तरीका पूछा गया, तो उन्होंने सिर्फ कहा – ‘नहीं’.

पहले भी कर चुके हैं इशारा

जनवरी में हाउस रिपब्लिकन रिट्रीट में ट्रंप ने मजाक में पूछा था – ‘क्या मैं फिर से चुनाव लड़ सकता हूं?’ रिपब्लिकन इवेंट्स में भी उन्होंने कई बार तीसरे कार्यकाल की इच्छा जाहिर की. इस बार उनकी बातें सबसे स्पष्ट संकेत मानी जा रही हैं कि वे किसी ‘सीक्रेट प्लान’ पर काम कर रहे हैं.

क्या यह संभव है?

संविधान के तहत, दो बार निर्वाचित राष्ट्रपति दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकता. लेकिन क्या ट्रंप कानूनी दांव-पेचों के सहारे इस नियम को चुनौती देंगे? यह देखना दिलचस्प होगा.

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‘मजाक नहीं कर रहा’, तीसरी बार राष्ट्रपति बनेंगे ट्रंप? सीक्रेट प्लान पर हंगामा

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PM मोदी मेरे अच्छे दोस्त, वह बहुत स्मार्ट हैं लेकिन भारत… ट्रैरिफ डील पर ट्रंप का बड़ा बयान

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Donald Trump On PM Modi: अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी ‘बहुत स्मार्ट’ शख्‍स‍ियत हैं और उनके ‘बहुत अच्छे दोस्त’ हैं. ट्रंप ने कहा, ‘मैं कहना चाहता हूं कि आपके पास एक महान प्रधानमंत्री …और पढ़ें

PM मोदी मेरे अच्छे दोस्त, वह बहुत स्मार्ट हैं लेकिन भारत... ट्रंप का बड़ा बयान

PM नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की फोटो का Studio Ghibli वर्जन. (Created with ChatGPT)

हाइलाइट्स

  • ट्रंप ने PM मोदी को ‘बेहद स्मार्ट’ और ‘करीबी दोस्त’ बताया.
  • उन्होंने भारत-अमेरिका टैरिफ बातचीत को लेकर उम्मीद जताई.
  • ट्रंप ने 2 अप्रैल से नए टैरिफ लागू करने की घोषणा की है.

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें अपना ‘करीबी दोस्त’ और ‘बेहद स्मार्ट नेता’ बताया. वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘PM मोदी हाल ही में यहां आए थे, हम हमेशा अच्छे दोस्त रहे हैं. भारत दुनिया के सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है, लेकिन मुझे लगता है कि हमारे बीच बातचीत अच्छी चल रही है.’ उन्होंने मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘वे बहुत समझदार व्यक्ति हैं और मेरे अच्छे दोस्त. आपके पास एक बेहतरीन PM हैं.



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