यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि अमेरिकी हमलों के बीच ईरान ने अपने सैन्य विमानों को पाकिस्तान में छिपाया है। अगर यह सच है, तो यह 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की याद दिलाता है। तब ईरान ने पाकिस्तानी सैन्य विमानों को अपने यहां पनाह दी थी और अब पाकिस्तान वही एहसान चुकाता नजर आ रहा है।नूर खान बेस पर विमान छिपाने के दावे और पाकिस्तान की सफाईअमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह आरोप लग रहे हैं कि पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने यहां शरण दी है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने 'सीबीएस न्यूज' को बताया कि ये दावे बिल्कुल अविश्वसनीय हैं क्योंकि उनका 'नूर खान बेस' शहर के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है, ऐसे में वहां विमानों के इतने बड़े बेड़े को छिपाना नामुमकिन है। दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रशासन ने भी अब तक सार्वजनिक तौर पर इस्लामाबाद पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया है। लेकिन अमेरिकी इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपब्लिकन पार्टी के सांसद लिंडसे ग्राहम ने अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से विचार करने की जरूरत पर जोर दिया। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।अफगानिस्तान भी भेजे गए ईरानी विमानरिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को पड़ोसी देश अफगानिस्तान भी भेजा है। एक अफगान नागरिक उड्डयन अधिकारी ने बताया कि तनाव बढ़ने से पहले 'महान एयर' का एक विमान काबुल में उतरा था। हालांकि, बाद में जब पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण काबुल एयरपोर्ट के भी निशाना बनने का डर पैदा हुआ, तो सुरक्षा के लिहाज से इस विमान को हेरात भेज दिया गया।
à¤ھूरी जानकारी
जानिए 1971 के भारत-पाक युद्ध से जुड़े ईरान के 50 साल पुराने 'एहसान' और नूर खान एयरबेस की इनसाइड स्टोरी। क्या पाकिस्तान 53 साल पुराने एक एहसान का कर्ज चुका रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि अमेरिकी हमलों के बीच ईरान ने अपने सैन्य विमानों को पाकिस्तान में छिपाया है। अगर यह सच है, तो यह 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की याद दिलाता है। तब ईरान ने पाकिस्तानी सैन्य विमानों को अपने यहां पनाह दी थी और अब पाकिस्तान वही एहसान चुकाता नजर आ रहा है।नूर खान बेस पर विमान छिपाने के दावे और पाकिस्तान की सफाईअमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह आरोप लग रहे हैं कि पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने यहां शरण दी है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने 'सीबीएस न्यूज' को बताया कि ये दावे बिल्कुल अविश्वसनीय हैं क्योंकि उनका 'नूर खान बेस' शहर के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है, ऐसे में वहां विमानों के इतने बड़े बेड़े को छिपाना नामुमकिन है। दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रशासन ने भी अब तक सार्वजनिक तौर पर इस्लामाबाद पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया है। लेकिन अमेरिकी इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपब्लिकन पार्टी के सांसद लिंडसे ग्राहम ने अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से विचार करने की जरूरत पर जोर दिया। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।अफगानिस्तान भी भेजे गए ईरानी विमानरिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को पड़ोसी देश अफगानिस्तान भी भेजा है। एक अफगान नागरिक उड्डयन अधिकारी ने बताया कि तनाव बढ़ने से पहले 'महान एयर' का एक विमान काबुल में उतरा था। हालांकि, बाद में जब पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण काबुल एयरपोर्ट के भी निशाना बनने का डर पैदा हुआ, तो सुरक्षा के लिहाज से इस विमान को हेरात भेज दिया गया।