यह रà¤؟à¤ھोरà¥چà¤ں ग र ष मक à¤ھर केंदà¥چरà¤؟à¤� � है। ग्रीष्मकालीन शिविर में बच्चों ने जानी भारतीय संस्कृतिMay 16, 2026 09:47 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, उरई Orai News - जालौन के प्राथमिक विद्यालय नैनपुरा में ग्रीष्मकालीन शिविर में बच्चों को भारतीय संस्कृति, कला और परंपरा से जोड़ा जा रहा है। भरतनाट्यम, कथक, और पेंटिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता को निखारा जा रहा है। शिक्षकों ने बच्चों को भारतीय कला और संस्कृति की महत्ता के बारे में बताया। जालौन। परिषदीय विद्यालयों में चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर में सीखने के साथ ही उनकी रचनात्मकता को भी निखारा जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय नैनपुरा में आयोजित शिविर के तीसरे दिन बच्चों को भारतीय संस्कृति, कला और परंपरा से जोड़ते हुए भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों एवं भारतीय चित्रकलाओं पर आधारित रोचक गतिविधियां कराई गईं। विद्यालय की शिक्षिका रीनू पाल ने बताया कि साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन शिविर के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में नई जानकारियां दी जा रही हैं, ताकि छुट्टियों के दौरान भी उनकी सीखने की प्रक्रिया जारी रहे। शिविर के तीसरे दिन बच्चों को भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथकली जैसे भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों के बारे में जानकारी दी गई।
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ग्रीष्मकालीन शिविर में बच्चों ने जानी भारतीय संस्कृतिMay 16, 2026 09:47 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, उरई Orai News - जालौन के प्राथमिक विद्यालय नैनपुरा में ग्रीष्मकालीन शिविर में बच्चों को भारतीय संस्कृति, कला और परंपरा से जोड़ा जा रहा है। भरतनाट्यम, कथक, और पेंटिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता को निखारा जा रहा है। शिक्षकों ने बच्चों को भारतीय कला और संस्कृति की महत्ता के बारे में बताया। जालौन। परिषदीय विद्यालयों में चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर में सीखने के साथ ही उनकी रचनात्मकता को भी निखारा जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय नैनपुरा में आयोजित शिविर के तीसरे दिन बच्चों को भारतीय संस्कृति, कला और परंपरा से जोड़ते हुए भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों एवं भारतीय चित्रकलाओं पर आधारित रोचक गतिविधियां कराई गईं। विद्यालय की शिक्षिका रीनू पाल ने बताया कि साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन शिविर के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में नई जानकारियां दी जा रही हैं, ताकि छुट्टियों के दौरान भी उनकी सीखने की प्रक्रिया जारी रहे। शिविर के तीसरे दिन बच्चों को भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथकली जैसे भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों के बारे में जानकारी दी गई।