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مشاهدة النسخة كاملة : समाज का प्रतिबिंब होता है लोक साहित्य : डॉ. शैलेंद्र


ahlam1399
05-17-2026, 04:15 PM
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Vikasnagar News - अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर बाबूगढ़ में संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें साहित्यकारों ने लोक साहित्य की वैश्विक दृष्टि और आत्मबोध पर चर्चा की। मुख्य वक्ता डॉ.

मुख्य बिंदु

Vikasnagar News - अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर बाबूगढ़ में संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें साहित्यकारों ने लोक साहित्य की वैश्विक दृष्टि और आत्मबोध पर चर्चा की। मुख्य वक्ता डॉ.
शैलेंद्र ने लोक साहित्य के महत्व को समझाया, जबकि रेखा खत्री रौथाण और डॉ.
नंदलाल भारती ने इसके सामाजिक और आंतरिक पहलुओं पर विचार साझा किए।


पूरी जानकारी
शैलेंद्र ने लोक साहित्य के महत्व को समझाया, जबकि रेखा खत्री रौथाण और डॉ. नंदलाल भारती ने इसके सामाजिक और आंतरिक पहलुओं पर विचार साझा किए।

स्रोत: https://www.livehindustan.com/uttarakhand/vikasnagar/story-seminar-on-folk-literature-insights-into-global-perspective-and-self-awareness-201779019703043.html