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مشاهدة النسخة كاملة : Aiims के बाहर रह रहे मरीजों को लेकर रिपोर्ट पर hc ने किया गौर, दिया यह आदेश


ahlam1399
05-16-2026, 12:38 PM
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यह रà¤؟à¤ھोरà¥چà¤ں AIIMS क ब हर à¤ھर केंदà¥چरà¤؟à¤� � है। AIIMS के बाहर रह रहे मरीजों को लेकर रिपोर्ट पर HC ने किया गौर, दिया यह आदेशJan 27, 2026 11:01 pm ISTKrishna Bihari Singh भाषा, नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को प्रमुख सरकारी अस्पतालों के बाहर भीषण ठंड में रह रहे मरीजों और उनके परिजनों को खराब मौसम के दौरान बचाने के लिए इमरजेंसी एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने एम्स के बाहर इलाज का इंतजार कर रहे फुटपाथ पर डेरा डाले मरीजों और उनके परिजनों की कथित 'दयनीय स्थिति' को प्रकाश डालती एक खबर पर संज्ञान लिया है। अदालत ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को सरकारी अस्पतालों के बाहर रह रहे मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए एक ठोस इमरजेंसी योजना बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि भीषण गर्मी और सर्दी के सीजन में बचाव के लिए साल में 2 बार योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।मरीजों को बचाने की योजना बनाएंदिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को निर्देश दिया कि वह सरकारी अस्पतालों के बाहर रह रहे मरीजों और उनके तीमारदारों को खराब मौसम से बचाने के लिए एक आपातकालीन योजना बनाए। न्यायालय ने कहा कि बोर्ड को गर्मी और शीत लहर से निपटने के लिए हर साल दो योजनाएं तैयार करनी होंगी जिन्हें निगरानी समिति की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाना जरूरी है।AIIMS के बाहर रह रहे मरीजों की स्थिति पर लिया संज्ञानमुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के बाहर इलाज के इंतजार में फुटपाथ पर रह रहे मरीजों और उनके परिजनों की दयनीय स्थिति पर प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। अदालत ने कहा कि गर्मी से निपटने की योजना जनवरी-फरवरी में ही तैयार कर ली जानी चाहिए। इसको मई-जून में लू चलने पर लागू कर दिया जाना चाहिए। इसको जुलाई-अगस्त तक बढ़ाया जा सकता है।एम्स ने पेश की रिपोर्टउच्च न्यायालय ने कहा कि इन ऐक्शन प्लान को कोऑर्डिनेशन बैठक में दक्षिण जिले के प्रधान जिला न्यायाधीश से मंजूर कराना जरूरी है जिसके बाद इन्हें लागू किया जा सकता है। अदालत ने देखा कि एम्स ने तय जगहों पर मरीजों और उनके तीमारदारों की मदद के लिए एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें रहने की जगह, आने-जाने की सुविधाएं सुरक्षा, सफाई, खाने की मदद और निगरानी जैसी सुविधाओं पर फोकस किया गया है।

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AIIMS के बाहर रह रहे मरीजों को लेकर रिपोर्ट पर HC ने किया गौर, दिया यह आदेशJan 27, 2026 11:01 pm ISTKrishna Bihari Singh भाषा, नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को प्रमुख सरकारी अस्पतालों के बाहर भीषण ठंड में रह रहे मरीजों और उनके परिजनों को खराब मौसम के दौरान बचाने के लिए इमरजेंसी एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने एम्स के बाहर इलाज का इंतजार कर रहे फुटपाथ पर डेरा डाले मरीजों और उनके परिजनों की कथित 'दयनीय स्थिति' को प्रकाश डालती एक खबर पर संज्ञान लिया है। अदालत ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को सरकारी अस्पतालों के बाहर रह रहे मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए एक ठोस इमरजेंसी योजना बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि भीषण गर्मी और सर्दी के सीजन में बचाव के लिए साल में 2 बार योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।मरीजों को बचाने की योजना बनाएंदिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को निर्देश दिया कि वह सरकारी अस्पतालों के बाहर रह रहे मरीजों और उनके तीमारदारों को खराब मौसम से बचाने के लिए एक आपातकालीन योजना बनाए। न्यायालय ने कहा कि बोर्ड को गर्मी और शीत लहर से निपटने के लिए हर साल दो योजनाएं तैयार करनी होंगी जिन्हें निगरानी समिति की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाना जरूरी है।AIIMS के बाहर रह रहे मरीजों की स्थिति पर लिया संज्ञानमुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के बाहर इलाज के इंतजार में फुटपाथ पर रह रहे मरीजों और उनके परिजनों की दयनीय स्थिति पर प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। अदालत ने कहा कि गर्मी से निपटने की योजना जनवरी-फरवरी में ही तैयार कर ली जानी चाहिए। इसको मई-जून में लू चलने पर लागू कर दिया जाना चाहिए। इसको जुलाई-अगस्त तक बढ़ाया जा सकता है।एम्स ने पेश की रिपोर्टउच्च न्यायालय ने कहा कि इन ऐक्शन प्लान को कोऑर्डिनेशन बैठक में दक्षिण जिले के प्रधान जिला न्यायाधीश से मंजूर कराना जरूरी है जिसके बाद इन्हें लागू किया जा सकता है। अदालत ने देखा कि एम्स ने तय जगहों पर मरीजों और उनके तीमारदारों की मदद के लिए एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें रहने की जगह, आने-जाने की सुविधाएं सुरक्षा, सफाई, खाने की मदद और निगरानी जैसी सुविधाओं पर फोकस किया गया है।


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