ahlam1399
05-16-2026, 12:35 PM
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यह रà¤؟à¤ھोरà¥چà¤ں म स म ल à¤ھर केंदà¥چरà¤؟à¤� � है। मुस्मिल देशों को साथ लेकर नया NATO तैयार कर रहा है पाकिस्तान, भारत के लिए कैसा खतरा?May 15, 2026 07:54 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते में अब कतर के शामिल होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गठबंधन को लेकर तुर्की के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। AI Quick ReadIslamic NATO: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल के दिनों में ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। एक टीवी इंटरव्यू में आसिफ ने संकेत दिया कि मुस्लिम-बहुल देशों के बीच एक बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन बनने जा रहा है। इसे अनौपचारिक रूप से इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है। यह गठबंधन अब कल्पना से आगे निकलते हुए ठोस योजना का रूप ले रहा है। यह भारत की चिंता भी बढ़ा सकता है।ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते में अब कतर के शामिल होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गठबंधन को लेकर तुर्की के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।आसिफ ने कहा, "यह भविष्य के लिए एक व्यवस्था है जिसमें वर्तमान भी शामिल है। यदि सऊदी-पाकिस्तान समझौते में कतर और तुर्की भी शामिल होते हैं, तो यह इस क्षेत्र के लिए एक स्वागत योग्य आर्थिक और रक्षा कदम होगा जिससे बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम होगी।"क्यों पड़ी इस गठबंधन की जरूरत?इस सुरक्षा ढांचे की नींव सितंबर 2025 में पड़ी थी, जब इजरायल ने कतर में हमास की एक बैठक को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए थे। हालांकि वे हमले रणनीतिक थे, लेकिन उन्होंने खाड़ी के मुस्लिम देशों की सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया। पिछले साल इसको लेकर संभावित सदस्य देशों के हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते को इस्लामिक नाटो का आधार माना जाता है। इसमें नाटो के 'अनुच्छेद 5' की तरह प्रावधान है, जिसके तहत एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा।2026 की शुरुआत में तुर्की ने इस गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। तुर्की के पास मुस्लिम जगत की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है और उन्नत रक्षा तकनीक है। कतर के पास न केवल विशाल आर्थिक संसाधन हैं, बल्कि उसके पास आधुनिक वायु सेना और नौसैनिक बुनियादी ढांचा भी है।विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन सफल होता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। सदस्य देश खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास और एकीकृत रक्षा योजना पर काम करेंगे। यह गठबंधन क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ईरान के प्रभाव को संतुलित करने और इजरायल जैसी बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए एक सामूहिक प्रतिरोध के रूप में कार्य करेगा। खाड़ी देश सुरक्षा के लिए पारंपरिक पश्चिमी देशों (अमेरिका और यूरोप) पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं।भारत के लिए चिंताएं और चुनौतियांभारत के लिए यह गठबंधन एक जटिल चुनौती पेश कर सकता है। पाकिस्तान की इससे ताकत बढ़ेगी। परमाणु संपन्न पाकिस्तान का इस गठबंधन में केंद्रीय भूमिका निभाना भारत के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। यह पाकिस्तान को कश्मीर और दक्षिण एशियाई सुरक्षा के संदर्भ में अधिक मुखर होने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। सऊदी अरब, कतर और तुर्की भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा भागीदार हैं। भारत को अपने आर्थिक हितों और उभरती सुरक्षा वास्तविकताओं के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा। यदि यह गठबंधन खाड़ी के समुद्री मार्गों पर प्रभाव डालता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत को अपनी सैन्य आधुनिकरण की गति तेज करनी पड़ सकती है और इजरायल, अमेरिका तथा यूरोपीय सहयोगियों के साथ खुफिया समन्वय गहरा करना होगा।
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मुस्मिल देशों को साथ लेकर नया NATO तैयार कर रहा है पाकिस्तान, भारत के लिए कैसा खतरा?May 15, 2026 07:54 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते में अब कतर के शामिल होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गठबंधन को लेकर तुर्की के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। AI Quick ReadIslamic NATO: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल के दिनों में ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। एक टीवी इंटरव्यू में आसिफ ने संकेत दिया कि मुस्लिम-बहुल देशों के बीच एक बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन बनने जा रहा है। इसे अनौपचारिक रूप से इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है। यह गठबंधन अब कल्पना से आगे निकलते हुए ठोस योजना का रूप ले रहा है। यह भारत की चिंता भी बढ़ा सकता है।ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते में अब कतर के शामिल होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गठबंधन को लेकर तुर्की के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।आसिफ ने कहा, "यह भविष्य के लिए एक व्यवस्था है जिसमें वर्तमान भी शामिल है। यदि सऊदी-पाकिस्तान समझौते में कतर और तुर्की भी शामिल होते हैं, तो यह इस क्षेत्र के लिए एक स्वागत योग्य आर्थिक और रक्षा कदम होगा जिससे बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम होगी।"क्यों पड़ी इस गठबंधन की जरूरत?इस सुरक्षा ढांचे की नींव सितंबर 2025 में पड़ी थी, जब इजरायल ने कतर में हमास की एक बैठक को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए थे। हालांकि वे हमले रणनीतिक थे, लेकिन उन्होंने खाड़ी के मुस्लिम देशों की सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया। पिछले साल इसको लेकर संभावित सदस्य देशों के हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते को इस्लामिक नाटो का आधार माना जाता है। इसमें नाटो के 'अनुच्छेद 5' की तरह प्रावधान है, जिसके तहत एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा।2026 की शुरुआत में तुर्की ने इस गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। तुर्की के पास मुस्लिम जगत की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है और उन्नत रक्षा तकनीक है। कतर के पास न केवल विशाल आर्थिक संसाधन हैं, बल्कि उसके पास आधुनिक वायु सेना और नौसैनिक बुनियादी ढांचा भी है।विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन सफल होता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। सदस्य देश खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास और एकीकृत रक्षा योजना पर काम करेंगे। यह गठबंधन क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ईरान के प्रभाव को संतुलित करने और इजरायल जैसी बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए एक सामूहिक प्रतिरोध के रूप में कार्य करेगा। खाड़ी देश सुरक्षा के लिए पारंपरिक पश्चिमी देशों (अमेरिका और यूरोप) पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं।भारत के लिए चिंताएं और चुनौतियांभारत के लिए यह गठबंधन एक जटिल चुनौती पेश कर सकता है। पाकिस्तान की इससे ताकत बढ़ेगी। परमाणु संपन्न पाकिस्तान का इस गठबंधन में केंद्रीय भूमिका निभाना भारत के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। यह पाकिस्तान को कश्मीर और दक्षिण एशियाई सुरक्षा के संदर्भ में अधिक मुखर होने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। सऊदी अरब, कतर और तुर्की भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा भागीदार हैं। भारत को अपने आर्थिक हितों और उभरती सुरक्षा वास्तविकताओं के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा। यदि यह गठबंधन खाड़ी के समुद्री मार्गों पर प्रभाव डालता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत को अपनी सैन्य आधुनिकरण की गति तेज करनी पड़ सकती है और इजरायल, अमेरिका तथा यूरोपीय सहयोगियों के साथ खुफिया समन्वय गहरा करना होगा।
सà¥چरोत: https://www.livehindustan.com/national/what-is-the-islamic-nato-pakistan-power-set-to-rise-india-concerns-could-mount-201778803726383.html
यह रà¤؟à¤ھोरà¥چà¤ں म स म ल à¤ھर केंदà¥چरà¤؟à¤� � है। मुस्मिल देशों को साथ लेकर नया NATO तैयार कर रहा है पाकिस्तान, भारत के लिए कैसा खतरा?May 15, 2026 07:54 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते में अब कतर के शामिल होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गठबंधन को लेकर तुर्की के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। AI Quick ReadIslamic NATO: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल के दिनों में ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। एक टीवी इंटरव्यू में आसिफ ने संकेत दिया कि मुस्लिम-बहुल देशों के बीच एक बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन बनने जा रहा है। इसे अनौपचारिक रूप से इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है। यह गठबंधन अब कल्पना से आगे निकलते हुए ठोस योजना का रूप ले रहा है। यह भारत की चिंता भी बढ़ा सकता है।ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते में अब कतर के शामिल होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गठबंधन को लेकर तुर्की के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।आसिफ ने कहा, "यह भविष्य के लिए एक व्यवस्था है जिसमें वर्तमान भी शामिल है। यदि सऊदी-पाकिस्तान समझौते में कतर और तुर्की भी शामिल होते हैं, तो यह इस क्षेत्र के लिए एक स्वागत योग्य आर्थिक और रक्षा कदम होगा जिससे बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम होगी।"क्यों पड़ी इस गठबंधन की जरूरत?इस सुरक्षा ढांचे की नींव सितंबर 2025 में पड़ी थी, जब इजरायल ने कतर में हमास की एक बैठक को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए थे। हालांकि वे हमले रणनीतिक थे, लेकिन उन्होंने खाड़ी के मुस्लिम देशों की सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया। पिछले साल इसको लेकर संभावित सदस्य देशों के हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते को इस्लामिक नाटो का आधार माना जाता है। इसमें नाटो के 'अनुच्छेद 5' की तरह प्रावधान है, जिसके तहत एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा।2026 की शुरुआत में तुर्की ने इस गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। तुर्की के पास मुस्लिम जगत की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है और उन्नत रक्षा तकनीक है। कतर के पास न केवल विशाल आर्थिक संसाधन हैं, बल्कि उसके पास आधुनिक वायु सेना और नौसैनिक बुनियादी ढांचा भी है।विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन सफल होता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। सदस्य देश खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास और एकीकृत रक्षा योजना पर काम करेंगे। यह गठबंधन क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ईरान के प्रभाव को संतुलित करने और इजरायल जैसी बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए एक सामूहिक प्रतिरोध के रूप में कार्य करेगा। खाड़ी देश सुरक्षा के लिए पारंपरिक पश्चिमी देशों (अमेरिका और यूरोप) पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं।भारत के लिए चिंताएं और चुनौतियांभारत के लिए यह गठबंधन एक जटिल चुनौती पेश कर सकता है। पाकिस्तान की इससे ताकत बढ़ेगी। परमाणु संपन्न पाकिस्तान का इस गठबंधन में केंद्रीय भूमिका निभाना भारत के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। यह पाकिस्तान को कश्मीर और दक्षिण एशियाई सुरक्षा के संदर्भ में अधिक मुखर होने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। सऊदी अरब, कतर और तुर्की भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा भागीदार हैं। भारत को अपने आर्थिक हितों और उभरती सुरक्षा वास्तविकताओं के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा। यदि यह गठबंधन खाड़ी के समुद्री मार्गों पर प्रभाव डालता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत को अपनी सैन्य आधुनिकरण की गति तेज करनी पड़ सकती है और इजरायल, अमेरिका तथा यूरोपीय सहयोगियों के साथ खुफिया समन्वय गहरा करना होगा।
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मुस्मिल देशों को साथ लेकर नया NATO तैयार कर रहा है पाकिस्तान, भारत के लिए कैसा खतरा?May 15, 2026 07:54 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते में अब कतर के शामिल होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गठबंधन को लेकर तुर्की के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। AI Quick ReadIslamic NATO: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल के दिनों में ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। एक टीवी इंटरव्यू में आसिफ ने संकेत दिया कि मुस्लिम-बहुल देशों के बीच एक बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन बनने जा रहा है। इसे अनौपचारिक रूप से इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है। यह गठबंधन अब कल्पना से आगे निकलते हुए ठोस योजना का रूप ले रहा है। यह भारत की चिंता भी बढ़ा सकता है।ख्वाजा आसिफ के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते में अब कतर के शामिल होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गठबंधन को लेकर तुर्की के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।आसिफ ने कहा, "यह भविष्य के लिए एक व्यवस्था है जिसमें वर्तमान भी शामिल है। यदि सऊदी-पाकिस्तान समझौते में कतर और तुर्की भी शामिल होते हैं, तो यह इस क्षेत्र के लिए एक स्वागत योग्य आर्थिक और रक्षा कदम होगा जिससे बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम होगी।"क्यों पड़ी इस गठबंधन की जरूरत?इस सुरक्षा ढांचे की नींव सितंबर 2025 में पड़ी थी, जब इजरायल ने कतर में हमास की एक बैठक को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए थे। हालांकि वे हमले रणनीतिक थे, लेकिन उन्होंने खाड़ी के मुस्लिम देशों की सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया। पिछले साल इसको लेकर संभावित सदस्य देशों के हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते को इस्लामिक नाटो का आधार माना जाता है। इसमें नाटो के 'अनुच्छेद 5' की तरह प्रावधान है, जिसके तहत एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा।2026 की शुरुआत में तुर्की ने इस गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। तुर्की के पास मुस्लिम जगत की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है और उन्नत रक्षा तकनीक है। कतर के पास न केवल विशाल आर्थिक संसाधन हैं, बल्कि उसके पास आधुनिक वायु सेना और नौसैनिक बुनियादी ढांचा भी है।विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन सफल होता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। सदस्य देश खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास और एकीकृत रक्षा योजना पर काम करेंगे। यह गठबंधन क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ईरान के प्रभाव को संतुलित करने और इजरायल जैसी बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए एक सामूहिक प्रतिरोध के रूप में कार्य करेगा। खाड़ी देश सुरक्षा के लिए पारंपरिक पश्चिमी देशों (अमेरिका और यूरोप) पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं।भारत के लिए चिंताएं और चुनौतियांभारत के लिए यह गठबंधन एक जटिल चुनौती पेश कर सकता है। पाकिस्तान की इससे ताकत बढ़ेगी। परमाणु संपन्न पाकिस्तान का इस गठबंधन में केंद्रीय भूमिका निभाना भारत के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। यह पाकिस्तान को कश्मीर और दक्षिण एशियाई सुरक्षा के संदर्भ में अधिक मुखर होने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। सऊदी अरब, कतर और तुर्की भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा भागीदार हैं। भारत को अपने आर्थिक हितों और उभरती सुरक्षा वास्तविकताओं के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा। यदि यह गठबंधन खाड़ी के समुद्री मार्गों पर प्रभाव डालता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत को अपनी सैन्य आधुनिकरण की गति तेज करनी पड़ सकती है और इजरायल, अमेरिका तथा यूरोपीय सहयोगियों के साथ खुफिया समन्वय गहरा करना होगा।
सà¥چरोत: https://www.livehindustan.com/national/what-is-the-islamic-nato-pakistan-power-set-to-rise-india-concerns-could-mount-201778803726383.html