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مشاهدة النسخة كاملة : खून-पानी साथ नहीं बहते,तो फिर पाकिस्तान से बातचीत क्यों? Rss के बयान पर जूली का कटाक्


ahlam1399
05-16-2026, 12:35 PM
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खून-पानी साथ नहीं बहते,तो फिर पाकिस्तान से बातचीत क्यों?

Key Points

खून-पानी साथ नहीं बहते,तो फिर पाकिस्तान से बातचीत क्यों?
RSS के बयान पर जूली का कटाक्षMay 16, 2026 11:45 am ISTSachin Sharma हिन्दुस्तान टाइम्स राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पाकिस्तान के साथ संभावित बातचीत को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब पहले यह कहा गया था राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पाकिस्तान के साथ संभावित बातचीत को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब पहले यह कहा गया था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते”, तो अब पाकिस्तान से बातचीत की जरूरत क्यों पड़ रही है। जूली ने इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।RSS के बयान पर प्रतिक्रियाजूली ने RSS के राष्ट्रीय महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। इस पर जूली ने सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने जब-जब भारत के खिलाफ हरकतें की हैं, देश और सेना ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया है। ऐसे में बातचीत की वकालत करना शहीद सैनिकों के बलिदान का अपमान है।विदेश नीति पर उठाए सवालउन्होंने भारत की विदेश नीति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ बातचीत की बात करना विरोधाभासी है। जूली के मुताबिक सरकार को पहले अपनी स्पष्ट नीति जनता के सामने रखनी चाहिए।पीएम की विदेश यात्राओं पर तंजइस दौरान जूली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं और सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद लगातार विदेश दौरों पर जा रहे हैं, जबकि देश की जनता को सादगी और त्याग की सीख दी जा रही है। जूली ने इसे दोहरे मापदंड करार देते हुए कहा कि पहले नेतृत्व को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए।पाकिस्तान मुद्दे पर फोकस बरकरारहालांकि इस बयानबाजी के केंद्र में पाकिस्तान से बातचीत का मुद्दा ही रहा। जूली ने कहा कि देश की जनता और सेना का मनोबल सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी प्रकार की बातचीत तभी होनी चाहिए जब वह देशहित और सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरती हो।नीतियों में विरोधाभास का आरोपजूली के अनुसार, पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर सरकार और संघ के भीतर अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि देश को स्पष्ट और मजबूत विदेश नीति की जरूरत है, न कि ऐसे विरोधाभासी बयानों की।सियासी माहौल गर्मराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है और इस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने दृष्टिकोण हैं। जूली का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है, लेकिन बयानबाजी के जरिए सियासी माहौल गर्म हो गया है।देशहित सर्वोपरिजूली ने अंत में कहा कि देश की सुरक्षा, सैनिकों का सम्मान और जनता का विश्वास सर्वोपरि है। सरकार को इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी फैसला लेना चाहिए।


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RSS के बयान पर जूली का कटाक्षMay 16, 2026 11:45 am ISTSachin Sharma हिन्दुस्तान टाइम्स राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पाकिस्तान के साथ संभावित बातचीत को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब पहले यह कहा गया था राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पाकिस्तान के साथ संभावित बातचीत को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब पहले यह कहा गया था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते”, तो अब पाकिस्तान से बातचीत की जरूरत क्यों पड़ रही है। जूली ने इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।RSS के बयान पर प्रतिक्रियाजूली ने RSS के राष्ट्रीय महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। इस पर जूली ने सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने जब-जब भारत के खिलाफ हरकतें की हैं, देश और सेना ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया है। ऐसे में बातचीत की वकालत करना शहीद सैनिकों के बलिदान का अपमान है।विदेश नीति पर उठाए सवालउन्होंने भारत की विदेश नीति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ बातचीत की बात करना विरोधाभासी है। जूली के मुताबिक सरकार को पहले अपनी स्पष्ट नीति जनता के सामने रखनी चाहिए।पीएम की विदेश यात्राओं पर तंजइस दौरान जूली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं और सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद लगातार विदेश दौरों पर जा रहे हैं, जबकि देश की जनता को सादगी और त्याग की सीख दी जा रही है। जूली ने इसे दोहरे मापदंड करार देते हुए कहा कि पहले नेतृत्व को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए।पाकिस्तान मुद्दे पर फोकस बरकरारहालांकि इस बयानबाजी के केंद्र में पाकिस्तान से बातचीत का मुद्दा ही रहा। जूली ने कहा कि देश की जनता और सेना का मनोबल सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी प्रकार की बातचीत तभी होनी चाहिए जब वह देशहित और सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरती हो।नीतियों में विरोधाभास का आरोपजूली के अनुसार, पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर सरकार और संघ के भीतर अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि देश को स्पष्ट और मजबूत विदेश नीति की जरूरत है, न कि ऐसे विरोधाभासी बयानों की।सियासी माहौल गर्मराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है और इस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने दृष्टिकोण हैं। जूली का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है, लेकिन बयानबाजी के जरिए सियासी माहौल गर्म हो गया है।देशहित सर्वोपरिजूली ने अंत में कहा कि देश की सुरक्षा, सैनिकों का सम्मान और जनता का विश्वास सर्वोपरि है। सरकार को इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी फैसला लेना चाहिए।

Source: https://www.livehindustan.com/rajasthan/jaipur/khun-pani-sath-nahi-behte-to-fir-pakistan-se-baatcheet-kyon-rss-ke-bayan-par-julie-ka-201778911682890.html