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مشاهدة النسخة كاملة : नमाज पर रोक, मंदिर में मां सरस्वती की प्रतिमा; भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले की 5 बड़


ahlam1399
05-16-2026, 11:08 AM
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नमाज पर रोक, मंदिर में मां सरस्वती की प्रतिमा; भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले की 5 बड़ी बातेंMay 15, 2026 04:08 pm ISTGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल Bhojshala Verdict: भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आज बड़ा फैसला लिया। अदालत ने कहा कि भोजशाला मंदिर है। हिंदू पक्ष में फैसला लेते हुए न्यायाधीश ने नमाज पर रोक लगा दी है। फैसले की पांच प्रमुख बातें जानते हैं। Bhojshala Verdict: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लंबे समय से चले आ रहे धार के भोजशाला परिसर विवाद में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि भोजशाला मंदिर है। हाई कोर्ट ने कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर बताया है। अदालत ने हिंदू पक्ष के पक्ष में फैसला लिया। कहा कि यह स्थल राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और यहां हिंदू पूजा की परंपरा कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार को लंदन संग्रहालय से मां सरस्वती की प्रतिमा वापस लाने की मांग पर विचार करने की भी अनुमति दी है।हाई कोर्ट की इस अहम टिप्पणी और फैसले के बाद भोजशाला विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। अदालत ने एएसआई की 2003 की उस व्यवस्था को भी आंशिक रूप से रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकार सीमित किए गए थे जबकि मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी।ये भी पढ़ें:अब भोजशाला में नहीं होगी नमाज; हिंदू पक्ष के वकील ने कोर्ट का पूरा आदेश बतायाभोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले की पांच प्रमुख टिप्पणी-राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का केंद्रहाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और साहित्य से यह स्पष्ट होता है कि विवादित परिसर भोजशाला था, जो परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का बड़ा केंद्र हुआ करता था। अदालत ने कहा कि यहां हिंदू पूजा की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य और प्रशासन का संवैधानिक दायित्व है कि श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और स्थल की पवित्रता तथा देवी के स्वरूप का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।पीठ ने कहा, “ऐतिहासिक साहित्य और उपलब्ध अभिलेख यह स्थापित करते हैं कि विवादित स्थल भोजशाला था, जो राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन केंद्र था। यहां हिंदू पूजा की परंपरा कभी खत्म नहीं हुई।”ये भी पढ़ें:भोजशाला को HC ने बताया मंदिर को तो ओवैसी को याद आया बाबरी वाला फैसला, क्या बोलेकोर्ट बोला- धार्मिक स्वरूप सरस्वती मंदिरहाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि भोजशाला- कमाल मौला परिसर एक संरक्षित स्मारक है, लेकिन इसका धार्मिक स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर का है।कोर्ट की इस टिप्पणी को हिंदू पक्ष के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। लंबे समय से हिंदू संगठन यह दावा करते रहे हैं कि यह मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर और शिक्षा केंद्र था।हिंदू करेंगे पूजा, नमाज पर रोकफैसले का सबसे अहम हिस्सा वह रहा जिसमें अदालत ने एएसआई के 2003 के आदेश के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह आदेश, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकार सीमित किए गए थे और मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई थी, अब निरस्त किया जाता है।अदालत ने कहा, “2003 का एएसआई आदेश, जिस हद तक वह हिंदुओं के पूजा अधिकारों को सीमित करता है और मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति देता है, रद्द किया जाता है।” इस आदेश के बाद अब परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार मिलेगा।ये भी पढ़ें:भोजशाला परिसर में सुरक्षा कड़ी; 1,200 पुलिसकर्मी तैनात, किन्हें कड़ी चेतावनी?एएसआई के पास रहेगा संरक्षण और नियंत्रणहाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई को निर्देश दिया कि भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षा गतिविधियों के प्रबंधन को लेकर उचित निर्णय लिया जाए। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि स्मारक के संरक्षण और देखरेख का पूरा अधिकार एएसआई के पास ही रहेगा। कोर्ट ने कहा, “केंद्र सरकार और एएसआई भोजशाला मंदिर तथा संस्कृत अध्ययन गतिविधियों के प्रशासन और प्रबंधन को लेकर निर्णय लें। एएसआई परिसर के संरक्षण और देखरेख पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखेगा।”लंदन से वापस लाई जाएगी मां सरस्वती की प्रतिमामामले की सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी मां सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग भी उठाई। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ही केंद्र सरकार को कई ज्ञापन दिए हैं और सरकार इस मांग पर विचार कर सकती है। अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ताओं ने देवी सरस्वती की प्रतिमा को लंदन संग्रहालय से वापस लाने के लिए कई प्रस्तुतियां दी हैं। केंद्र सरकार इन मांगों पर विचार कर सकती है।”क्या है भोजशाला विवाद?मध्य प्रदेश धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वर्षों से यहां पूजा और नमाज को लेकर विशेष व्यवस्था लागू थी। मंगलवार को हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाती थी जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता था।लेखक के बारे मेंGaurav Kalaगौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य संक्षिप्त विवरण: गौरव काला पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। वह विशेष रूप से हिमालयी राज्य उत्तराखंड के अलावा, दिल्ली-एनसीआर, मध्यप्रदेश, झारखंड समेत कई हिंदी बेल्ट के राज्यों की खबरें कवर कर रहे हैं। विस्तृत बायो परिचय और अनुभव: गौरव काला का भारतीय डिजिटल मीडिया जगत में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वह वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में, वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट टीम सेक्शन का हिस्सा हैं। पिछले पांच वर्षों से वह पहले होम टीम का हिस्सा रहे और अब बड़ी बखूबी से स्टेट टीम में अपनी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। उन्हें डिजिटल पाठकों की पसंद और बदलती प्रवृत्तियों (Trends) को समझने में विशिष्ट महारत हासिल है। गौरव का करियर प्रिंट मीडिया से शुरू होकर टीवी जगत और डिजिटल मीडिया तक फैला हुआ है। यही वजह है कि उनकी खबरों में गहराई और सटीकता की झलक दिखती है। शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग: गौरव मॉस कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। पहले बी.

ए.

इन मॉस कम्यूनिकेशन और फिर आधुनिक पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन होने के कारण उनके पास खबरों की ठोस समझ है। 2011 में दैनिक जनवाणी अखबार में क्राइम रिपोर्टिंग से पत्रकारिता शुरू करने के बाद उन्होंने ईटीवी भारत में बतौर एंकर और स्क्रिप्ट राइटर पर तौर पर काम किया। 2015 में डिजिटल पत्रकारिता में एंट्री लेते हुए अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों में काम किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय खबरों को भी कवर किया, बल्कि आकर्षक लेखनी से पाठकों के बीच लोकप्रियता बनाई। सितंबर 2021 में गौरव लाइव हिन्दुस्तान की नेशनल टीम के साथ जुड़े। तब से वह न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय, वायरल समाचार और मौसम संबंधी खबरों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, बल्कि राजनीतिक, रिसर्च बेस स्टोरीज भी कवर कर रहे हैं। अपनी मजबूत लेखनी के दम पर वह खबरों को आकर्षक नए कलेवर के साथ आम जनता तक पहुंचा रहे हैं। डिजिटल ट्रेंड्स के साथ रिपोर्टिंग: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बदलते ट्रेंड्स को समझना गौरव की बड़ी ताकत है। वायरल खबरों, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और इंटरनेट कल्चर से जुड़े विषयों को वह तथ्यात्मक जांच और संतुलित प्रस्तुति के साथ सामने रखते हैं। उनकी यही क्षमता उन्हें क्लिक-बेस्ड नहीं, बल्कि कंटेंट-बेस्ड पत्रकार बनाती है। इसके अलावा वह राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीति से जुड़े मुद्दों को तथ्यात्मक गहराई और संतुलित दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करते हैं। पत्रकारिता का उद्देश्य: गौरव के लिए पत्रकारिता केवल खबर देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य और जनहित को प्राथमिकता देते हुए पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना है। वह अपनी लेखनी से सत्ता, समाज और आम जनता के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद सेतु बनाने में विश्वास रखते हैं। विशेषज्ञता (Areas of Expertise): राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार वायरल और ट्रेंडिंग कंटेंट राजनीतिक और रिसर्च-आधारित स्टोरीज हेडलाइन और न्यूज़ प्रेजेंटेशन और पढ़ें div.tagsblk {margin-bottom: 18px; position: relative; margin-right: 4px;} .trendingTopicSeperator:after { content: ""; display: block; position: absolute; top: 0px; right: 0px; bottom: 0px; left: auto; margin: auto; width: 40px; background-image: linear-gradient(90deg, transparent 0%, #ffffff 92%); height: 100%; } .trendingTopicSeperator { border-right: solid 1px #d2d2d2; border-color: #61616180; max-width: calc(74% - 5px); position: relative; margin-right: 10px; } div.tagsblk{ margin-bottom: 0px; display: flex; a{ background-color: #fff; border-radius: 2px; color: rgba(34, 34, 34, 0.60); font-size: 14px; padding: 0 3px; margin-right: 11px; display: flex; line-height: 22px; border: 1px solid rgba(0, 0, 0, 0.12); cursor: pointer; } &.dark { a { background-color: #1a1a1a; color: #cecece; } } .moreTags{ display: none; } } div.tagsblk a {font-size: 12px;} div.tagsblk a:hover { background-color: #c4132a; border: 1px solid #c4132a; color: white; cursor: pointer; } Mp News High Court News Madhya Pradesh News अन्य..

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المصدر: https://www.livehindustan.com/madhya-pradesh/bhojshala-kamal-maula-mosque-verdict-no-namaz-saraswati-idol-in-temple-high-court-top-observations-201778839551782.html